भोपाल, 31 अगस्त (Udaipur Kiran) । मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल जिला शहडोल अब सिर्फ कोयले और जंगलों के लिए नहीं, बल्कि फुटबॉल के जुनून के लिए भी जाना जा रहा है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 125वें एपिसोड में जिले के विचारपुर गांव का जिक्र किया और बताया कि यहां से निकले खिलाड़ी अब जर्मनी में ट्रेनिंग पाने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि शहडोल के बच्चों की लगन और मेहनत ने दुनिया को प्रभावित किया है और यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।
दरअसल, विचारपुर गांव की कहानी किसी प्रेरक गाथा से कम नहीं। कभी यह गांव अवैध शराब और नशाखोरी के लिए बदनाम था लेकिन सालों पहले यहां के पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉलर रईस अहमद ने ठाना कि युवाओं को नशे से दूर कर खेल की राह पर लगाया जाए। उन्होंने अपने स्तर पर बच्चों को फुटबॉल सिखाना शुरू किया। महंगे जूतों और सुविधाओं के अभाव में बच्चों ने बांस की खपचियों से बने गोलपोस्ट और पुराने जूतों में अभ्यास करना शुरू किया। यही बीज धीरे-धीरे ‘फुटबॉल क्रांति’ में बदल गया।
आज विचारपुर को लोग प्यार से “मिनी ब्राजील” कहते हैं। यहां फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। गांव से अब तक 40 से अधिक बच्चे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। इतना ही नहीं, यहां चार-पांच साल के छोटे बच्चे भी गेंद के साथ मैदान में उतर जाते हैं। यही वजह है कि शहडोल अब मध्य प्रदेश का फुटबॉल हब बन चुका है।
2023 की मन की बात में पहला जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार जुलाई 2023 में 103वें एपिसोड में विचारपुर का नाम लिया था। उन्होंने बताया था कि कैसे यह गांव नशे की गिरफ्त से निकलकर खेलों का गढ़ बन गया है। उस समय उन्होंने छोटे बच्चों यश और अनिदेव के फुटबॉल प्रेम का उदाहरण दिया था। उस दौरान देशभर में विचारपुर चर्चा का केंद्र बन गया था।
पॉडकास्ट से बदली तस्वीर
इस साल जुलाई में प्रधानमंत्री ने मशहूर अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में भी विचारपुर की कहानी साझा की। यह पॉडकास्ट दुनियाभर में सुना गया और जर्मनी के फुटबॉल खिलाड़ी और कोच डिएटमार बेइयर्सडॉर्फर तक पहुंचा। कोच बेइयर्सडॉर्फर, जिन्होंने जर्मनी में बड़े क्लबों को ट्रेन किया है, इस कहानी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों से संपर्क किया और विचारपुर के खिलाड़ियों को जर्मनी बुलाकर ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव रखा।
2025 की मन की बात में ऐतिहासिक घोषणा
एक बार फिर आज 31 अगस्त को प्रसारित 125वें एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने यह घोषणा की कि अब शहडोल के कुछ युवा खिलाड़ी जर्मनी जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शहडोल या मध्य प्रदेश के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि मेहनत और जुनून से कोई भी छोटा गांव दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान बना सकता है।
चार बच्चों का चयन
विचारपुर से फिलहाल चार बच्चों का चयन किया गया है, जिन्हें जल्द ही जर्मनी ले जाया जाएगा। चयनित खिलाड़ियों में छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जो यहां की नई फुटबॉल पीढ़ी का प्रतीक हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने भी पूरी तैयारी शुरू कर दी है और राज्य के खेल विभाग की ओर से बच्चों को यात्रा और प्रशिक्षण की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता
विशेषज्ञों का कहना है कि शहडोल का यह उदाहरण भारतीय फुटबॉल के लिए मील का पत्थर साबित होगा। अब तक देश में फुटबॉल प्रायः गोवा, पश्चिम बंगाल, केरल और उत्तर-पूर्व के राज्यों से जुड़ा माना जाता था, लेकिन अब मध्य भारत का यह छोटा सा गांव दुनिया की निगाहों में है। जर्मनी में मिलने वाली ट्रेनिंग से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और आगे वे राष्ट्रीय टीम तक पहुंच सकते हैं।
रईस अहमद की मेहनत का फल
गांव में हर कोई मानता है कि यह सफलता दरअसल रईस अहमद की वर्षों की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने अकेले दम पर फुटबॉल को गांव की पहचान बनाया। उन्होंने कहा था, “मैं चाहता था कि हमारे बच्चे शराब और नशे से दूर रहें। फुटबॉल ने उन्हें नई दिशा दी है।” आज उनकी यही सोच गांव की तकदीर बदल चुकी है। आज शहडोल का विचारपुर अब सिर्फ “मिनी ब्राजील” नहीं, बल्कि भारत की नई खेल क्रांति का प्रतीक बन गया है। प्रधानमंत्री की सराहना, अंतरराष्ट्रीय कोच का समर्थन और जर्मनी ट्रेनिंग की खबर ने इस छोटे से गांव को विश्व मानचित्र पर ला खड़ा किया है। आने वाले समय में यहां के बच्चे देश के लिए गोल दागते दिखें तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने कार्यक्रम में शहडोल को लेकर मुख्यतौर पर यह बात रखी। उन्होंने कहा कि दो साल पहले मैं शहडोल गया था, वहां के फुटबॉल खिलाड़ियों से मिला था। पॉडकास्ट के दौरान एक सवाल के उत्तर में मैंने शहडोल के फुटबॉल खिलाड़ियों का भी जिक्र किया था। यही बात जर्मनी के फुटबॉल खिलाड़ी और कोच डिएटमार बेइयर्सडॉर्फर ने भी सुनी। शहडोल के युवा फुटबॉल खिलाड़ियों की जीवन यात्रा ने उन्हें बहुत प्रभावित और प्रेरित किया। सही में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि वहां के प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दूसरे देशों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेंगे। अब जर्मनी के कोच ने शहडोल के कुछ खिलाड़ियों को जर्मनी की एक अकादमी में ट्रेनिंग देने की पेशकश की है। इसके बाद मध्य प्रदेश की सरकार ने भी उनसे संपर्क किया है। जल्द ही शहडोल के हमारे कुछ युवा-साथी ट्रेनिंग कोर्स के लिए जर्मनी जाएंगे। मुझे यह देखकर भी बहुत आनंद आता है कि भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। मैं फुटबॉल प्रेमियों से आग्रह करता हूं कि जब समय मिले वे शहडोल जरूर जाएं और वहां हो रहे खेल क्रांति को करीब से देखें।”
—————
(Udaipur Kiran) / डॉ. मयंक चतुर्वेदी
You may also like
सितंबर में लॉन्च होने जा रहीं ये धांसू गाड़ियां, Maruti से Mahindra तक ने कर ली तैयारी
श्रीलंका बनाम जिम्बाब्वे : पथुम निसांका ने जड़ा वनडे करियर का 7वां शतक
सिर्फ ₹5000 में शुरू करें ये बिजनेस, हर महीने होगी मोटी कमाई
अमेरिकी अखबार का दावा, नोबेल नॉमिनेशन न मिलने पर भारत पर टैरिफ का दबाव
मीरजापुर में 25 केन्द्रों पर 43,200 अभ्यर्थी देंगे यूपी पीईटी परीक्षा