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हार्वर्ड विश्वविद्यालय में यहूदी विरोधी और इस्लामोफोबिया का साया, रिपोर्ट जारी की, किया बदलाव का वादा

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वाशिंगटन, 30 अप्रैल . संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान हार्वर्ड विश्वविद्यालय पिछले कुछ समय से यहूदी विरोधी और इस्लामोफोबिया की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है. हार्वर्ड विश्वविद्यालय की मंगलवार को सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है. हार्वर्ड ने इसमें बदलाव का वादा किया है. उल्लेखनीय है कि हार्वर्ड ने पिछले दिनों फंड में कटौती का विरोध करते हुए ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

द न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार, हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने यहूदी विरोधी और इस्लामोफोबिया पर रिपोर्ट के बाद बदलाव का वादा किया है. यह दोनों रिपोर्ट हार्वर्ड टास्क फोर्स ने जारी की हैं. हार्वर्ड टास्क फोर्स ने कहा है कि यहूदी विरोधी भावना ने पाठ्यक्रम, सामाजिक जीवन, कुछ संकाय सदस्यों की नियुक्ति और कुछ शैक्षणिक कार्यक्रमों के वैश्विक दृष्टिकोण में घुसपैठ कर ली है.

हार्वर्ड टास्क फोर्स ने कैंपस में अरब विरोधी, मुस्लिम विरोधी और फिलिस्तीन विरोधी पूर्वाग्रह पर एक अलग रिपोर्ट भी जारी की है. इसमें कहा गया है कि अधिकांश मुस्लिम विद्यार्थियों को अपने राजनीतिक विचारों को व्यक्त करने के लिए शैक्षणिक या पेशेवर दंड का सामना करना पड़ता है. उल्लेखनीय है कि ट्रंप प्रशासन कैंपस में यहूदी विरोधी भावना के आरोपों की जांच कर रहा है. विश्वविद्यालय संघीय निधि में अरबों डॉलर वापस लेने का विरोध कर रहा है.

द बोस्टन ग्लोब की खबर के अनुसार, इस रिपोर्ट के आने के बाद अरब और मुस्लिम विद्यार्थियों ने कहा कि कैंपस में उन्हें दोयम दर्जे के नागरिक जैसा महसूस होता है. साथी उन्हें संदेह की दृष्टि से देखते हैं. हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने ट्रंप प्रशासन के साथ अपने असाधारण टकराव के बीच दोनों रिपोर्ट मंगलवार को जारी की हैं. दोनों रिपोर्ट पिछले साल शरद ऋतु में जारी की जानी थी. ट्रंप प्रशासन ने 19 अप्रैल को मांग की थी कि हार्वर्ड यहूदी विरोधी रिपोर्ट से संबंधित सभी दस्तावेज सौंपे.

उल्लेखनीय है कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय मैसाचुसेट्स राज्य के कैम्ब्रिज शहर में स्थित है. यह एक निजी शोध विश्वविद्यालय है और आईवी लीग का सदस्य है. यह संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्च शिक्षा का सबसे पुराना संस्थान है. इसकी स्थापना 1636 में हुई थी. यहां पढ़ चुके कई लोगों को नोबेल और पुलित्जर पुरस्कार मिल चुका है. फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भी यहां के छात्र रहे हैं.

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/ मुकुंद

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